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हकीकत:पोर्न फिल्मो ने समाज में महिलाओ को कहा से कहा लाकर खड़ा कर दिया ,सच्ची कहानी

कुछ बातों से तकलीफ भी होती है ..मैं समझाती हूँ ...Please मेरी परेशानी भी समझो ..तो कहते हैं ..मुझे तो यही सब और ऐसे ही करना है ..अगर तू करती है तो ठीक वरना मैं ..बाहर दूसरी देख लूँगा
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Gaurav Kushwaha
Published: 2021-10-14 07:10:55
माही (बदला हुवा नाम ) कहती है जबसे इनको टच स्क्रीन  फोन दिलाया है  उसी में दिन भर लगे  रहते हैं  पता  नहीं क्या  क्या  देखते  रहते हैं ..शायद कुछ गलत देख रहे हैं ..कुछ गंदे विडियों ( Porn  Video )  देखते हैं ..मुझे भी कहते हैं  देखने के लिए ..मना करती हूँ  तो नाराज़ होते हैं ..और गंदी वाली मूवी भी देखते हैं ..ज़बरदस्ती मुझे भी दिखाते हैं ..मुझे पसंद नहीं हैं  ये सब पर क्या करूँ पति  हैं ना हर बात माननी पड़ती है ..हर रोज़ नई बातें होती हैं ..जो देखते  हैं  वही और वैसे ही करने की ज़िद होती है ..मुझे अच्छा नहीं लगता शरीर  में उतनी ताकत नहीं बची है। 

कुछ बातों से तकलीफ भी होती है ..मैं  समझाती हूँ ...Please मेरी परेशानी भी समझो ..तो कहते हैं ..मुझे तो यही सब और ऐसे ही करना है ..अगर तू  करती है  तो ठीक वरना मैं ..बाहर  दूसरी देख लूँगा ..और तेरी तरफ मुड़कर भी नहीं देखूँगा..तो मैं  हर बात मान लेती हूँ ..लेकिन कभी जब मेरी बर्दाशत खत्म  जो जाती है..तो मैं बिल्कुल मना कर देती हुँ। 

बस उस दिन बहुत  झगड़ा हो जाता है मेरे हाथ का बनाया खाना नहीं खाते  पानी नहीं पीते मुझसे बात करना तो दूर की बात है  मेरी तरफ निगाह उठाकार भी नहीं देखते जब मैं कहती हूँ  आपका खाना लगा दूँ चाय बना दूँ तो जवाब नहीं देते एक ही पल में हम अजनबी हो जाते हैं और ताने मरने का कोई मौका नहीं छोड़ते कहते हैं। 

तू मेरे  किसी काम की नहीं  है ...औरत के नाम पर धब्बा है ..तेरी सूरत  से नफरत हो गई है  मुझे .. ..तू मेरे किसी काम की नहीं ..तू मुझे  खुश  नहीं रख सकती ..मेरी ज़रूरत पूरी नहीं कर सकती...तुझ जैसी औरत को तो मर जाना चाहिये ....पर मैं  तो उनकी हर ज़रूरत का ख्याल रखती हूँ ...उनका खाना ..कपड़े .दवाई .किसी चीज़ की कहना नहीं पड़ता .सब काम हमेशा time पर तैयार मिलते हैं ..ये बातें भी सब मान लेती थी..पर अब ये बदल गए हैं ..इनके तरीके बदल गए हैं .


इनको सबकुछ वैसे ही करना होता है ..जैसे  फिल्मो में य़ा Videos में दिखाया होता है ....क्या  मैं  इंसान नहीं हूँ ..क्या मुझको तकलीफ नहीं होती ..पर उन्हे  अहसास ही नहीं है ..शादी के इतने साल बाद भी वो मेरे नहीं हो पाए ..मुझे नहीं समझ पाए ..मेरी ख़ुशी य़ा मेरे दर्द से उनको कोई मतलब नहीं है ..शायद किसी के पास जाते भी होंगे कहते हैं ..दूसरी औरतें मना  नहीं करती ..तेरे ही नखरे हैं। 

सोचती हूँ  सही तो कहते हैं ..मैं  मुझ जैसी  औरत को मर जाना ही चाहिये ........ये कहते कहते रो पड़ी थीं ..वो ....और मैं  समझ नहीं पा रही थी उनको कैसे समझाऊँ ,
मेरे पास कोई जवाब नहीं था उनकी इस परेशानी का....क्योंकि ये सिर्फ इनकी परेशानी नहीं है।ऐसी और .......बहुत हैं। भारतीय समाज की वर्तमान आधुनिक समस्या...जिसकी शिकार कोई ना कोई बेटी होती है


साभार : सोशल मीडिया 

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