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गोमती रिवर फ्रंट घोटाला: चुनावों से ठीक पहले जागा घोटाले का जिन्न ?

  • कई राजनेताओं का फिसल सकता है राजनीतिक कैरियर।
  • 190 पर मामला दर्ज ,जारी है छापेमारी।
  • 1513 करोड़ का है पूरा मामला ।
  • सपा प्रमुख अखिलेश यादव की बढ़ेगी मुश्किलें।

पीटीएन: (गौरव कुशवाहा) !! गोमती रिवर फ्रंट घोटाला अगर एक तरफ कर दिया जाए तब भी लखनऊ नवाबो का शहर है था और ऐसा ही चलता रहा तो बना भी रहेगा लखनऊ हमारी राजधानी है यही से सरकारों का उठना बैठना निश्चित होता है चुकी निकट भविष्य में चुनाव होने वाले है मुख्यमंत्री की सीट का सवाल होगा तो बस राजधानी का चर्चाओं में रहना अब तो लाजमी सा है।

1513 करोड़ में 1437 करोड़ खर्च काम हुवा महज 60% ?

कहते है गोमती नदी के किनारों को सजाने के लिए 1513 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट समाजवादी पार्टी के समय पास किया गया था अब हम आपको यह किनारों को सजाने का सीधा-साधा अनुवाद समझा दे इसे ही गोमती रिवर फ्रंट घोटाला (Gomti river front scam ) कहां जा रहा है अब इतना पैसा पास हो गया और 1437 करोड़ खर्च भी हो जाता है लेकिन काम महज 60 फीसद ही हुआ तो मामला तो होना ही था बस योगी सरकार को मौका मिला और सीबीआई की संस्तुति केंद्र सरकार से कर दी आप घोटाला करने वालों को थोड़ी ही पता था की आगे आने वाली सरकार भाजपा की आ जाएगी और केंद्र में भी भाजपा पहुंच जाएगी इसलिए 60 फ़ीसदी काम किया था बाकी का काम आगे करने की तैयारी थी बस यही जुल्म हो गया।

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अब सीबीआई और एंटी करप्शन विंग दोनों ही मिलकर 2017 से इसकी जांच में जुट गए लेकिन अभी तक सबूत नहीं जुटा पाए थे चुकी अब चुनाव सर पर है तो दबाव बना रहना चाहिए ।

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सीबीआई Cbi यानी कि केंद्रीय जांच ब्यूरो की टीम ने उत्तर प्रदेश समेत राजस्थान और पश्चिम बंगाल तक में 40 से अधिक ठिकानों पर जबरदस्त छापेमारी कर डाली उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर और रायबरेली में छापेमारी की गई और लगभग 190 लोगों पर एफ आई आर भी दर्ज की गई है ।

आपको बताते हैं क्या है गोमती रिवरफ्रंट घोटाला ?

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के सुपुत्र वर्तमान सपा मुखिया अखिलेश यादव की सरकार में लखनऊ की प्रसिद्ध गोमती नदी के किनारे को विकसित करने के लिए 1513 करोड़ रुपए का बेहद विशाल प्रोजेक्ट पास किया गया था इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए टेंडर देने के लिए डिफॉल्टर कंपनियों को टेंडर की शर्ते बदलकर लगभग 800 से अधिक टेंडर पास किए गए हालात यह हो गए की 1437 करोड़ों रुपए खर्च हो गए लेकिन रिवरफ्रंट का 60 फीसद काम भी पूरा नहीं हुआ वही जिन कंपनियों को टेंडर दिया गया था उन कंपनियों ने लगभग लगभग पूरा ही पैसा खर्च कर 95% का बजट बनाकर पेस का डाला।

कब और किसने दिए जांच के आदेश ?

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद 2017 में योगी सरकार ने गोमती रिवर फ्रंट में हुए इस बड़े घोटाले की न्यायिक जांच हेतु एक आयोग गठित किया था आयोग ने जांच में बताया कि डिफाल्टर कंपनियों को टेंडर देने की बात सही है और यह भी सही है कि कम से कम 800 से अधिक कंपनियों को टेंडर भी दिए गए हैं डिफॉल्टर कंपनियों में काम करवाने का अधिकार चीफ इंजीनियर को दिया जाता था इस घोटाले की निष्पक्ष जांच हो इसलिए 2017 में ही रिटायर्ड जज आलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग से जांच करवाई गई जिसमें लगभग सारी खामियां सामने निकल कर आ गई अब आयोग ने जांच करने के बाद मामले पर आरोपियों को सजा दिलाने के लिए सीबीआई जांच की संस्तुति केंद्र सरकार को कर दी फिर क्या था सीबीआई मामले को लेकर अब घोटाले में लिप्त दोषियों को जेल भेजने की तैयारी कर रही है।

कैसे हुआ इतना बड़ा घोटाला ?

आप सभी जानते होंगे की ज्यादातर राजनीतिक पार्टीयो की सरकार के दौरान कोई ना कोई घोटाला जरूर सामने निकल कर आता है ठीक उसी तरह रिवर फ्रंट भी अखिलेश सरकार के लिए ग्रहण बनकर आया है, इसके निर्माण कार्य में जुड़े इंजीनियरों पर कई गंभीर आरोप लगे है . इंजीनियरों पर दागी कंपनियों को काम देने का दबाव बनाया गया, निर्माण प्रक्रिया के दौरान विदेशों से जान पहचान वाली कंपनियों से ही महंगी दर पर सामान खरीदने वाले लोग अलग से काम करते थे, चैनलाइजेशन के कार्य में भी घोटाला करने, नेताओं और अधिकारियों के विदेश दौरे में अपना पेट भरने के लिए फिजूलखर्ची करने सहित वित्तीय लेन-देन में घोटाला करने और नक्शे के अनुसार कार्य नहीं कराने तक का सीधे तौर पर आरोप है ।

कई इंजीनियर इसका विरोध करते थे लेकिन नेता और अधिकारी मिलकर उनके विरोध को खत्म कर देते थे नोटों की बरसात के बीच सभी ने गोमती नदी नहा ली और जनता का 1500 करोड़ों रुपया डुबो दिया।

फिलहाल मामले पर गिरफ्तारियां कब तक होंगी कहा नहीं जा सकता लेकिन होंगी जरूर यह जरूर कहा जा सकता है हम आपको बता दें चुनाव सर पर हैं और भारतीय जनता पार्टी समाजवादी पार्टी आमने सामने है उत्तर प्रदेश में तो कहीं ना कहीं सपा मुखिया को अप्रत्यक्ष तौर पर मुश्किलों का सामना भी इस दौरान करना पड़ सकता है योगी आदित्यनाथ महाराज उत्तर प्रदेश में 5 साल का समय पूरा करने वाले हैं और कुर्सी का लालच किसी लत की तरह ही नेताओं की रगों में उतर जाता है ये तो हम सभी जानते है खैर हम आगे भी आपको ऐसी ही अपडेट्स देते रहेंगे।

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Gaurav Kushwaha

Mr. Gaurav Kushwaha crossing over 5 years of experience in this industry. Now He is the Editor-in-chief in Prime Today.

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