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Corruption: एसएनके SNK और नगर निगम का खेला होई वाला संगम

पीटीएन खुलासा: कानपुर: उत्तरप्रदेश में इन दिनों समाजवादी पार्टी का बंगाली नारा शहर की आबोहवा में इस कदर घुला की कानपुर नगर निगम भी खेला होई की राह पर चल दिया ।

कानपुर नगर निगम और पनकी स्थित A2Z मेस ( घरेलू कूड़ा निस्तारण प्लांट ) प्लांट की दोस्ती की चर्चाएं हवा में है जब हम अधिकारियो से इस बादल और जमीन वाली दोस्ती का कारण पूछते है तो झल्ला कर फोन काट दिया जाता है खैर अब हम आपको इस विषय पर विस्तार से बताते है पनकी स्थित A2Z प्लांट घरेलू कूड़े के उचित निस्तारण हेतु लगाया गया था कुछ दिनों ये पूरी तरह से प्राइवेट रहा लेकिन सरकारी अधिकारियो को नुकसान होने पर इसे कानपुर नगर निगम के हवाले कर दिया गया।

  • अब प्राइवेट होने के दौरान जो मन की मुरादे अधिकारी पूरी नही कर पाए वो अब नगर निगम के अधिकृत होते ही पूरी करने की पूरी करने की भरपेट कोशिशें होने लगी ।
  • कानपुर नगर निगम से अधिग्रहण के बाद सबसे पहले औधोगिक कचरे को भारी भरकम रकम लेकर ठिकाने लगाने का काम किया गया

जान लीजिए की क्या होता है औधोगिक कचरा ?

फैक्ट्रियों में जब कोई उत्पाद तैयार किया जाता है तब वह उत्पाद तैयार होने के बाद काफी मात्रा उसका वेस्ट ( यानी की व्यर्थ ऐसा उत्पाद जो इस्तेमाल नही किया जा सकता ) ऐसे व्यर्थ उत्पाद को ही फैक्ट्री वेस्ट मैटेरियल कहते है यह किसी भी सूरत में हो सकता है जैसे वाटर लिक्विड , कपड़े , प्लास्टिक या फिर पन्नी के रूप में ।

क्या नुकसान है और क्या उपाय है इसके ?

उत्तरप्रदेश में किसी भी बड़ी फैक्ट्री को अपना वेस्ट मैटेरियल रिसाइकल करने के लिए वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट लगाना होता है जो की नई उद्योग नीति के तहत लागू किया जा चुका है.चुकी वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट की लागत काफी होती है जिसे बचने के लिए कई फैक्ट्री संचालक स्थानीय पुलिस और अधिकारियो को अपने प्यार के जाल में फसा कर इसे खाली पड़ी जमीनों में या तो फेक देते है या फिर जला देते है जिसे जमीने बंजर हो जाने का खतरा बढ़ जाता है साथ ही तरह तरह की बीमारियों को भी यही से जन्म मिलता है इसके घातक नुकसान होते है अब जब इनके खिलाफ कोई व्यक्ति या क्षेत्रीय जनता आवाज उठाती है तब भी कोई भी कार्यवाही इन दिग्गज उद्योगपतियों के खिलाफ नही होती थक हार कर आवाजे उठना बंद हो जाती है।

ताजा मामला कानपुर नगर निगम द्वारा अधिकृत A2Z मेस और शहर के नौजवानों की जिंदगी को अपना अदभुत पान मसाला खिलाकर परम आनंद देने वाली एसएनके पान मसाला औधोगिक प्लांट के वेस्ट मैटेरियल के अनाधिकृत तरीके से A2Z मेस में प्रवेश से जुड़ा हुआ है ।

जब इस बावत कानपुर नगर आयुक्त अक्षय त्रिपाठी Akshay Tripathi से बात करने की कोशीश की गई तब एसएनके SNK का नाम सुनते ही जैसे जले पर नमक छिड़क दिया गया हो इस अंदाज में फोन काट दिया गया।

खैर हमने हार ना मानते हुए कुछ अन्य अधिकारियों और उनके मातहतो से बात की तब नाम न खोलने की शर्त पर उन्होंने बताया की एसएनके फैक्ट्री से रोजाना दो डंपर जिसमे लगभग 4 ,4 टन रैपर वेस्ट साथ ही आप जो भी अन्य औद्योगिक कचरा यहां फेंकना चाहते हो यहां पर अधिकारियों की सेटिंग सेटिंग से वह भी अंदर हो जाता है भले ही पर्यावरण जो भी नुकसान हो रहा हो नाम न खोलने पर यह भी बताया कि जब मृत मवेशियों को फेंकने की कोई जगह नहीं मिलती उस सूरत में ए टू जेड प्लांट सहारा बनता है और यह सब अधिकारियो की जानकारी में भी है यह सच्चाई सुनकर हमारे होश उड़ गए. औद्योगिक कचरा A2Z मेस में अधिकारियो की मिलीभगत से भिजवाया जाता है .पूरे ही मामले के तार बहुत ऊंचे लोगो से जुड़े हुए है ।

प्लास्टिक वेस्ट रैपर A2Z प्लांट में पीछे की तरफ आग के हवाले कर दिया जाता है जिसे अगल बगल आने वाले गावो बदुआपुर ,जमुई,पनका,सरांयमीता में तरह तरह की सास से जुड़ी बीमारियों ने पैर पसारने सुरु कर दिए है।

ए टू जेड प्लांट में कूड़े के साथ साथ जानवरों के मृत शरीरों का भी होता है निस्तारण ? अब भी नहीं बोलेंगे जिम्मेदार

हमारी कवरेज के दौरान प्लांट के अंदर हमें मवेशी का मृत शरीर भी मिला जो पूरी तरह से डैमेज हो रहा था और सामने ही जाने वाली रास्ते पर पड़ा था जो भयंकर दुर्गंध और कीटाणुओं से भरा पड़ा था अब समझ में आया नहीं आया कि क्या जानवर ए टू जेड मेस के अंदर आकर मर गया या फिर इन अधिकारियों ने इसका भी सौदा कर डाला अरे कानूनों की बात करने वाले कानपुर नगर निगम की पोल पूरी तरह से खुल चुकी है अब सिर्फ देखने वाली बात यही होगी किन के ऊपर क्या एक्शन और कब लिया जाता है।

क्यों नहीं होती कार्यवाही ?

किसी भी तरह की काली कमाई का जरिया अगर बन जाए तो उसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है ठीक वही हाल हो रहा है ए टू जेड मेस में औधोगिक कचरे को निपटाने के नाम पर लाखों के बंडल अधिकारियो के बैंक बैलेंस को भारी करते है साथ ही प्रमोशन ट्रांसफर की जिम्मेदारी जो बनी सो अलग ऐसे में सैलेरी के बाद मिलने वाली लक्ष्मी को नियमो के लिए ना देना बहुत बड़ी बात है ।

Gaurav Kushwaha

Mr. Gaurav Kushwaha crossing over 5 years of experience in this industry. Now He is the Editor-in-chief in Prime Today.
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